Should we have killer instinct ?

I was listening to some famous personality … who is immensely successful person … while giving the talk the most prominent statement which resonated with the audience was ” we must play to win , we must have killer instinct

I was one of the them who got excited after listening this! I was thinking what a great statement…. this feeling remained with me for a quite considerable time …

I started practising this in my life … every day in the morning I used to recite the statement like mantra “come on you have to win …”

Time passed and somehow I started feeling discomfort at my heart …

I was feeling that I am deviating from the my natural behaviour … , I am not responding to the situation the way should I have done ideally , I realised somewhere I am going wrong …. I started analysing the statement ” We must play to win ”

I was searching the real meaning for this … and a famous statement of Lord Shri Krishna just pop up in front of me …

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन । मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि ॥ 

You have a right to perform your prescribed duty, but you are not entitled to the fruits of action. Never consider yourself to be the cause of the results of your activities, and never be attached to not doing your duty. –

I was further confused one successful person recommending ” play to win ” and Lord is instructing just “doing the duty without getting attached to its phala … “

I was pondering on this thought … after long thought and consideration I realised ….

we must play to win statement should be taken in the spirit of ” never give up …. giving one’s best in all situation without thinking the end result.

we must have self confidence even in most critical situations of our life …

we must play to win but not to win with others … instead we must play to win ourself … every moment one should just have the attitude to giving one’s best …probably this is real meaning of ”

We must play to win & one must have killer instinct “

If we practice this in a very materialistic manner it will result in stress , envy … even if we get the desired materialist results … it will not be sustainable!

Just to mention that I am not at a successful man …I am just a mechanical engineer who is doing a job of 8 to 6 pm .. like most of the youngsters does !

I am sharing this in the context of managing my Job !



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धन से ख़ुशी !

पुणे से दिल्ली की यात्रा २.१० घंटे की है सोचा कुछ लिखू जो मेरे मन में बहुत दिनों से चल रहा है ।

आज के जीवन के इस दौर में हम माने या ना माने हम सब धनार्जन के पीछे लगे हैं।कोई भी अगर ये कहता है कि पैसा मेरे लिए अहमियत नहीं रखता मुझे लगता है कि वो अपने आप से पूरा सच नहीं बोल रहा है। जीवन की धुरी धन से ही चलती है ये तो सब जानते है । पर धन की लालसा के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण ये भी है की हम लोगों को ऐसा लगता है कि धन हमारे जीवन मे ख़ुशी आधार है ।

आइए हम एक बहुत ही मूल्यवान श्लोक जो मैंने बचपन में पढ़ा था उस को देखें की , क्या वास्तव में ऐसा है ?

विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम् ।पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम् ॥

व्याख्या : विद्या विनय देती है विनय से पात्रता आती है । पात्रता से धन आता है धन से धर्म होता है और फिर धर्म से सुख के प्राप्ति होती है ।

ध्यान देने वाली बात यह है की धन से सुख के प्राप्ति को नकारा गया है और धन से धर्म और फिर धर्म से सुख के प्राप्ति की बात कही गयी है ।

अब प्रश्न यह है कि धर्म है क्या , मेरी व्याख्या यह है की कोई भी कर्म जो आपको अपने वास्तविकता की ओर ले जाए वो धर्म है।

धन की जीवन में बहुत महत्ता है , पर जीवन की धुरी धन नहीं धर्म हो तो जीवन आनंद से भर जाता है , कमी रहने पर भी आप ख़ुश रहते है क्योंकि आपको ये पता होता है की आप उस ईश्वर की संतान है जो सर्व ऐश्वर्यशाली है। वास्तव में तो जो भी हमारे पासहै वो तो ईश्वर का ही है हम तो बस अज्ञानतावश उसे अपना मान लेते हैं ।

वास्तव मे धन से सहूलियत होती है सहूलियत को सुख मान लेना समझदारी नहीं।

मैंने उन लोगों को ज़रा भी नीचा नहीं दिखाना चाहता जो धन को जीवन का लक्ष्य मानते है । मैं तो बस एक विचार प्रस्तुत कर रहा हूँ ज़रा सोचिए की क्या आपने कमाए हुए धन से आप धर्म का कार्य करते हैं, वो भी अहंकार रहित होकर !

अगर नहीं तो ज़रा प्रयोग तो कीजिए जनाब!


रौशन सिंह

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Mumbai stampede who is responsible!

Feeling very sad due to loss of life of 22 people in a unfortunate stampede In Mumbai . This is really unfortunate and onus goes to western railway.

At the same time many so called ,

imminent people on social media is drawing a pathetic parallel this incident with bullet train and statue of legendary shiva Ji Maharaj.

I may also say to those people that “do they feel shame for living a lavish life style when many people in this country are struggling for basics thing in this county.”

Yes , My logic is idiotic thus their criticism of drawing the parallel of the unfortunate incident due to bullet train and statue of shiva Ji Maharaj and Patel Sahab ! Isn’t it.

If 3.5 years of Modi rule is responsible for this then I have right to say that for every single unfortunate happened in our motherland , pathetic Gandhi family is responsible !

Come on, Fair criticism is welcome but hate for one person is just not done !

Analysis must be done, but basis facts and logic it shouln’t be propelled by impulse and our personal

Liking and disliking.

Every one in this country is well aware that things are moving in right and good direction but just to vent out the hate for a person they choose Modi responsible for every bad incident.

Pathetic things happens and a fair government’s duty is to fix to responsibility and ensure the countermeasure so that things doesn’t go wrong in future, which is exactly being done.

Many people who believed that ruling is Their birth right , are in deep trouble because they are still not able to believe how a chai wala , poor person and a low caste person can become the PM of India and that too how can he do so well !

Believe me these people don’t have any sympathy for lost life , in fact they are entertained that they have got a chance to criticises a honest and hardworking PM .

Today is Vijayadashami I wish love and peace for everyone in our legendary country & for all People around the globe.

Roushan singh.

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मानव ईश्वर की अद्भुत रचना … भाँति भाँति के लोग । 

तरह तरह के लोगों से मिलना उनसे बातें करना और उनके व्यक्तित्व का अवलोकन करना मुझे अच्छा लगता है ।

अगर मैंउनको अपने ढंग से वर्ग में विभाजित करूँ तो ….एक वर्ग ऐसा है जिसके लिए जीवन एक साधन है आनंद प्राप्त करने के लिए … उनके जीवन में कोई लक्ष्य नहीं , वे लक्ष्य को एक बोझ के तरह मानते हैं तर्क यह दिया जाता है कि क्यों हम अपने जीवन को इतनी गम्भीरता से लें ! कल का सोच कर हम आज बर्बाद क्यों करें। काफ़ी उन्नत सोच है पर इन लोगों की समयस्या ये होती की आनंद  का सही अर्थ ये मतरगस्ती समझते हैं , जो जी में आए वो करो । कुछ लोगों की बुद्धि ज़रा उन्नत होती , तो एक और सोच जुड़ जाती है की जो जी में आए वो करो जब तक दूसरों को तकलीफ़ ना हो । 

थोड़ा और आगे जाएँ तो , समाज में एक वर्ग ऐसा है जिसे पता होता है कि उसे क्या करना है …. हमलोग उसे बड़ा ही समझदार और बुद्धिमान की उपाधि देते हैं,  वास्तव में इस प्रकार के लोग अभिनंदन के पात्र हैं भी क्योंकि जीवन में कुछ लक्ष्य ना होने से अच्छा है की कुछ तो लक्ष्य हो !ये लोग अपने लक्ष्य के प्रति इतने गम्भीर होते हैं कि बाक़ी सब उन्हें बकवास लगता है । ये भगवान श्री कृष्ण के ज्ञान का भी उल्लेख करते हैं कि ” कर्म करो ” पर इनका कर्म फल की लालसा से भरा होता है , ये भगवान की उक्ति को अपने तरह से समझ लेते हैं  और उनका अपना भावार्थ बड़ा ही तर्क संगत होता है । इस वर्ग के लोगों के लिए जीवन में भौतिक सफलता का बड़ा ही महत्व होता है ! अपनी भौतिक महत्वकांक्षा ही उनके जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य होता है और उसे पाने के लिए हुए प्रयास को ये कर्म कहते हैं।

आगे जाने पर एक और तरह के लोग मिलते है जिनके जीवन में लक्ष्य तो है पर लक्ष्य नहीं भी , कामना है पर वे कामना से ग्रसित नहीं …. दुःख है पर दुखी नहीं … सुख भी है पर उसकी आदत नहीं … उनके जीवन के मायने अजीब होते हैं अगर हम दुनिया के दृष्टिकोण से देखें तो । इन्हें किसी चीज़ की परवाह नहीं … ये सारे काम वही करते हैं जो आम आदमी करता है पर पता नहीं ये  बस काम में ही आनंद ढूँढ लेते हैं इन्हें सफलता और असफलता से ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ता है । ईश्वर अनंत हैं इसलिए उनकी रचना भी अभूतपूर्व है अकल्पनीय है । ज़रा सोचिए आप किस तरह के हैं ।

मैंने वर्गों की व्याख्या किसी को किसी से तुलना के लिए  नहीं की है ये तो बस मेरे रुचि का हिस्सा है मानव के प्रवृतियों को समझना और ईश्वर की असीम रचना का आनंद लेना ।

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जय मुकुंद बिहारी
जय जय गिरिबर धारी ।
जय हो माखन चोर
जय जय चित चोर ।
जय हो यशोदा और नंद के प्यारे ,
जय हो भक्तों के पालन हारे ।
जय हो गोविंद , जय हो मधुसधन ,
जिसने तुमको भजा ,
जीवन उसका हो जाए मधुबन।
हे ब्रम्हाण्ड के स्वामी, हे आदिपुरुष ,
प्रार्थना है सबके जीवन में भक्ति का जीवन में हो समावेश।

हरे कृष्णा ।

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Hello world!

Welcome to This is your first post. Edit or delete it and start blogging!

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